Chapter 1a/81
"क्या आपने कभी सोचा है कि जब आप अपनी फेवरेट चॉकलेट खाते हैं, तो वो मज़ा शब्दों में क्यों नहीं बता पाते?
"ताओ" का मतलब है रास्ता या, आसानी से समझें तो, जीने की कला। लाओ त्से अपनी किताब "ताओ ते चिंग" में हमें समझाने की कोशिश करते हैं कि हमें जीना कैसे चाहिए।पहले चैप्टर में 5 बातें हैं जिन्हें हम 2 पार्ट्स में समझेंगे।
पहली बात:
"जिस ताओ को शब्दों में बताया जा सकता है, वो असली ताओ नहीं है।
जिस नाम से उसे पुकारा जा सके, वो असली नाम नहीं है।"
लाओ त्से ने अपनी किताब की पहली ही लाइन में लिखा है कि 'जो ताओ शब्दों में बताया जा सकता है, वो असली ताओ है ही नहीं।' तो क्या बात यहीं ख़त्म? किताब बंद कर दें? नहीं, ऐसा नहीं है... लाओ त्से कहना चाहते हैं वो कितनी भी कोशिश कर लें पर असली ताओ को वर्ड्स में नहीं समझा पाएंगे, वो आप को ही धीरे धीरे समझना होगा। जैसे चॉकलेट खाने के बाद जो फीलिंग आती है, उसे शब्दों में नहीं बताया जा सकता। कितनी भी कोशिश कर लीजिए, मगर उस असली फीलिंग को आप शब्दों में समझा नहीं सकते। शब्द बस इशारा करते हैं, पूरा एहसास नहीं देते, वो असली मज़ा महसूस नहीं करा सकते। इसलिए हम उस फीलिंग को चाहकर भी कोई नाम नहीं दे सकते, क्योंकि कोई भी नाम उस पूरी फीलिंग को महसूस नहीं करा पाएगी।
दूसरी बात:
जिसका कोई नाम नहीं, वही हर चीज़ की शुरुआत है। उसका कोई दायरा (लिमिट) नहीं है।
जिसे नाम मिल गया, वो सारी चीज़ों की माँ बन गया और दायरे (लिमिट) में बंध गया।"
चलिए, इसे अपनी फेवरेट चॉकलेट से समझते हैं। जब तक हमने उस फीलिंग को नाम नहीं दिया, वो कितनी भी बड़ी हो सकती है, खूब सारी फीलिंग्स का मिक्सचर भी हो सकती है, मैजिकल भी हो सकती है, डिवाइन भी हो सकती है वो लिमिटलेस है। पर जैसे ही हम उसे नाम दे देते हैं, जैसे "टेस्टी", हम उसे "टेस्टी" के डिब्बे में बंद कर देते हैं लिमिट में बांध देते हैं। नाम देते ही चीज़ें अलग-अलग डिब्बों में बँट जाती हैं। डिवाइड हो जाती हैं।
तो पहली दो बातों से लाओ त्से हमें यही सीखने की कोशिश करते हैं कि ज़िंदगी के एहसासों, रिश्तों और चीजों को नाम देने की जल्दबाज़ी ना करें, बल्कि उन्हें बिना किसी दायरे के, खुले मन से महसूस करें।"
"क्या आप जानते हैं आपके दिल को धड़कना किसने सिखाया आपको सांस लेना किसने सिखाया?"
तीसरी बात:
"इच्छा छोड़कर देखो, तो दुनिया के छुपे राज़ दिखते हैं।
इच्छा के साथ देखो, तो बस ऊपर-ऊपर की चीज़ें दिखती हैं।"
जब हम अचानक कहीं घूमने का प्लान बना लेते हैं, बिना किसी मकसद या उम्मीद के, और हमें पता भी नहीं होता कि हमारे साथी हमें कहाँ ले आए, तब छोटी-छोटी चीज़ें भी इंटरेस्टिंग लगती हैं। आप हवा, पेड़, रास्ते की हर छोटी चीज़ महसूस कर पाते हो। लेकिन जब आप सिर्फ़ फोटो खींचकर इंस्टाग्राम पे डालने की चाहत से जाते हो, तब नज़र बस "अच्छी फोटो" ढूँढने में लग जाती है। बाकी सब नज़रअंदाज़ हो जाता है।
अब सोचिए, दोस्तों के साथ बिना मकसद के खेलने में ज़्यादा मज़ा आता है, या सिर्फ़ जीतने के लिए खेलने में? जब हम सिर्फ जीतने के लिए खेलते हैं, तो खेल का असली मज़ा (ताओ) छूट जाता है।
चौथी बात:
"राज़ और दिखाई देने वाली दुनिया, दोनों एक ही जगह से निकलते हैं।
फ़र्क बस इतना है कि हम उन्हें अलग-अलग नाम दे देते हैं।"
जैसे बीज छोटा सा होता है मगर उसमें पूरा पेड़ छुपा होता है, बस जब वो बीज होता है तब दीखता नहीं है, राज़ की तरह। जब वो पेड़ बनकर सामने आता है, तब दिखता है। बीज और पेड़ दोनों अलग दिखते हैं, पर एक ही चीज़ की दो स्टेज हैं। फिर भी हम दोनों को अलग नाम दे देते हैं एक को बीज और एक को पेड़ और दो अलग-अलग डिब्बों में बंद कर देते हैं।
पांचवी बात:
"राज़ के अंदर भी एक राज़ है। वही सारी समझ का दरवाज़ा है।"
"और उसी गहराई से जीवन की सच्ची समझ का दरवाज़ा खुलता है।"
सोचिए, बीज को कैसे पता चलता है कि उसे पेड़ बनना है? एक आम की गुठली को कैसे पता चलता है कि उसे आम का ही पेड़ बनना है, वो सेव का पेड़ क्यों नहीं बनती?
अच्छा जब आप बहोत छोटे बच्चे थे, तब आपको किसने साँस लेना सिखाया? आपके दिल को धड़कना किसने सिखाया? ये सब तो आपको कभी सिखाया ही नहीं गया। अभी इसी वक़्त, बिना सोचे, आपका दिल धड़क रहा है और साँस चल रही है। आपके अंदर भी एक बीज जैसा राज़ छुपा है, जो सब कुछ जानता है। लाओ त्से कहते हैं कि उस राज़ को महसूस करना ही असली ताओ की समझ की शुरुआत है।
तो पहले चैप्टर में हमें ये समझ आता है कि हर चीज़ को नाम देकर डिब्बे में बंद नहीं करना चाहिए, क्योंकि ज़िंदगी डिब्बे से बड़ी है। तो आज कुछ ऐसा करिए जिसका कोई मकसद न हो। न फोटो, न जीतना। शायद बस छत पर जाकर हवा को महसूस करना? और फिर कमेंट में बताइयेगा कि वो 'बिना नाम वाली फीलिंग' कैसी लगी।
“मैं एक-एक करके आगे के चैप्टर्स का ट्रांसलेशन/इंटरप्रिटेशन आसान शब्दों में करने की कोशिश कर रहा हूं, जैसे जैस होते जायेंगे अपलोड करता रहूंगा . . . :)"
"Do you know who taught your heart to beat? Who taught you to breathe?"
Third thing:
"Look without desire, and you see the hidden secrets of the world.
Look with desire, and you see only superficial things."
When we suddenly plan a trip, without any purpose or expectation, and we don't even know where our companions are taking us, even the smallest things seem interesting. You can feel the breeze, the trees, every little detail on the path. But when you go just to take a photo and post it on Instagram, your focus becomes solely on finding the "good photo." Everything else is overlooked.
Now think, is it more fun to play aimlessly with friends, or to play just to win? When we play just to win, the true joy of the game (the Tao) is lost.
Fourth:
"The secret and the visible world both emerge from the same source.
The only difference is that we give them different names."
Just as a seed is small, but it contains a whole tree hidden within it. It's just that when it's a seed, it's invisible, like a secret. It becomes visible only when it grows into a tree. The seed and the tree both look different, but they're two stages of the same thing. Yet we give them different names: one a seed and the other a tree, locking them into two separate compartments.
Fifth:
"There's a secret within the secret. That's the door to all understanding."
"And from that depth opens the door to true understanding of life."
Think about it: how does a seed know it's destined to become a tree? How does a mango seed know it's destined to become a mango tree? Why doesn't it become an apple tree?
So, when you were a very small child, who taught you to breathe? Who taught your heart to beat? You were never taught this. Right now, without thinking, your heart is beating and breathing. There's a seed-like secret hidden within you, one that knows everything. Lao Tzu says that realizing that secret is the beginning of understanding the true Tao.
So, in the first chapter, we learn that not everything should be boxed up with a name, because life is bigger than a box. So, today, do something without a purpose. Not a photo, not a win. Maybe just go up to the roof and feel the breeze? And then tell us in the comments how you felt about that 'nameless feeling'.
"I am translating them in easy words one by one, I will continue to upload subsequent chapters and any further information as it becomes available, . . . :)
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